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अमेरिका में लॉटरी से ही मिलेगा एच-1बी वीजा, मुकदमा खारिज
amarujala.com-presented by:संदीप भट्ट
Updated Thu, 30 Mar 2017 06:40 AM IST
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एजेंसी/वाशिंगटन। अमेरिका में एच-1 बी वीजा के सफल आवेदकों के चयन में इस्तेमाल की जाने वाली लॉटरी व्यवस्था को चुनौती देने संबंधी मुकदमे को एक अमेरिकी अदालत ने खारिज कर दिया है। इससे अमेरिका में एच-1 बी वीजा की बाट जोह रहे आवेदनकर्ताओं को राहत की आस बंधी है, क्योंकि यह वीजा भारतीय आईटी कर्मियों और पेशेवरों में सर्वाधिक लोकप्रिय है।
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ओरेगन में एक संघीय न्यायाधीश द्वारा सुनाए गए फैसले का अर्थ यह है कि तीन अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष 2018 में एच-1 बी वीजा जारी करने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। परिणास्वरूप अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) द्वारा लॉटरी व्यवस्था के जरिए सफल एच-1 बी वीजा आवेदकों पर फैसला होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) को अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ द्वारा स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक एच-1 बी वीजा आवेदन मिलते हैं। इसमें आम श्रेणी में 65 हजार की सीमा है जबकि अमेरिकी शैक्षणिक संस्थान से मास्टर्स या उच्च डिग्री लेने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20 हजार की सीमा है।
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इस लॉटरी व्यवस्था के खिलाफ पोर्टलैंड की दो कंपनियों ने मुकदमा दर्ज कराया था, जिनमें पहली वेब डेवलपमेंट कंपनी टेनरेक इंक है और दूसरी वास्तुकला कंपनी वॉकर मैकी शामिल है। गत सप्ताह अपने 31 पेज के आदेश में अमेरिकी जिला अदालत के जज माइकल सिमोन ने यूएससीआईएस की इस दलील को उचित ठहराया जिसमें एच-1 बी वीजा आवेदन को तब तक दायर नहीं माना जाता है, जब तक कि लॉटरी से उस पर फैसला नहीं हो जाता। जज ने कहा कि वादी के पास इस बात का कोई सुझाव नहीं था कि डेढ़ लाख आवेदनों को ठीक उसी दिन कैसे पहुंचाया जाएगा। मामले का प्रतिनिधित्व करने वाले अटार्नी ब्रेंट रेनिसन ने बताया कि अदालत ने यह नहीं कहा है कि लॉटरी एक बेहतर जरिया है, बल्कि स्वीकृत रास्ता सुझाया है।
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वीजा की संख्या घटाने पर जोर
वाशिंगटन। अमेरिका में उत्तरी कैरोलिना के कद्दावर सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था के हिसाब से एच-1 बी कार्य वीजा की संख्या को बढ़ाने या कम करने की जरूरत है। टिलिस सीनेट की वित्तीय समिति के समक्ष पेश हुए विशेषज्ञों से यह जानना चाहते थे कि क्या अमेरिका में तीन से साढे़ तीन प्रतिशत जीडीपी के लिए एच-1 बी वीजा की जरूरतों को पूरा करने के लिए काबिल लोग मौजूद हैं? उन्होंने कहा कि इसीलिए हम अमेरिका में ऐेसे कारोबार ढूंढना चाहते हैं, जिनमें वीजा कार्यक्रमों की आवश्यक्ता ही नहीं पड़े। लेकिन यह तभी संभव है जब हमारी अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी काबिल लोग देश में हों। इस पर हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और प्रमुख अर्थशास्त्री विलियम स्प्रग्सि ने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब अमेरिका अमेरिकी नागरिकों में पर्याप्त निवेश करना जारी रखे।
दो भारतवंशियों पर वीजा धोखाधड़ी के आरोप
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने भारतीय मूल के दो अमेरिकी नागरिकों पर भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एच-1 बी वीजा हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप तय कर दिए हैं। इनके नाम जयवेल मुरूगन (46) और सैयद नवाज (40) है। यदि ये दोनों दोषी साबित होते हैं तो उन्हें 20 साल की जेल या ढाई लाख डॉलर का जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। संघीय अभियोजक ने आरोप लगाया है कि फ्रेमोंट स्थित डायनासॉफ्ट सिनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरूगन और नवाज ने भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एच-1 बी वीजा हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का 2010 से 2016 तक इस्तेमाल किया था। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक डायनासॉफ्ट सिनर्जी इंक कैलिफोर्निया में स्थित है और भारत में इसका एक दफ्तर चेन्नई शहर में भी है।
दो भारतवंशियों पर वीजा धोखाधड़ी के आरोप
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने भारतीय मूल के दो अमेरिकी नागरिकों पर भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एच-1 बी वीजा हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप तय कर दिए हैं। इनके नाम जयवेल मुरूगन (46) और सैयद नवाज (40) है। यदि ये दोनों दोषी साबित होते हैं तो उन्हें 20 साल की जेल या ढाई लाख डॉलर का जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। संघीय अभियोजक ने आरोप लगाया है कि फ्रेमोंट स्थित डायनासॉफ्ट सिनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरूगन और नवाज ने भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एच-1 बी वीजा हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का 2010 से 2016 तक इस्तेमाल किया था। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक डायनासॉफ्ट सिनर्जी इंक कैलिफोर्निया में स्थित है और भारत में इसका एक दफ्तर चेन्नई शहर में भी है।