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ईडी: 60 सप्ताह में 3% का साप्ताहिक रिटर्न या प्लॉट का वादा, जुटाए 2676 करोड़, 47664 निवेशकों से हुई ठगी
Tue, 13 Oct 2026 05:00 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 13 Oct 2026 05:00 PM IST
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ED
- फोटो : ED
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल ऑफिस ने 'नेक्सा एवरग्रीन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड केस' से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में, जयपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारनिया) और अन्य आरोपियों/संस्थाओं के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 की धारा 44 और 45 के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (मुकदमा चलाने की शिकायत) दायर की है। जांच से पता चला है कि 2019-2023 के बीच नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के जरिए निवेशकों से लगभग 2,676 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। कंपनी ने जो वादा किया था, वह उस पर खरी नहीं उतरी।
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ईडी की जांच राजस्थान पुलिस द्वारा नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने निवेशकों को यह झूठा दावा करके लुभाया था कि फंड को गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में जमीन के विकास और प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा। उन्होंने 60 हफ़्तों तक 3 प्रतिशत का पक्का साप्ताहिक रिटर्न या प्लॉट अलॉटमेंट का वादा किया था। इसके साथ ही मल्टी-लेवल रेफरल स्कीम के तहत नए निवेशकों को जोड़ने पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार जैसे इनाम देने का भी लालच दिया था।
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कंपनी ने जनवरी 2023 में पेमेंट अचानक रोक दिए गए और वेबसाइट, मोबाइल एप्लीकेशन और ऑफिस बंद कर दिए गए। कंपनी के सॉफ्टवेयर डेटा के अनुसार, 47,664 निवेशकों को उनके द्वारा निवेश की गई रकम से कम पैसे मिले, जिससे कुल मिलाकर 932.54 करोड़ रुपये की कमी हुई। ईडी की जांच से पता चला कि रणवीर सिंह उर्फ रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया इस धोखाधड़ी वाले काम को पूरी तरह से कंट्रोल करते थे। उन्होंने अपने साथियों और निवेशकों के नाम पर कई कंपनियां, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और प्रोप्राइटरशिप फर्म बनाई थीं।
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इन कंपनियों और उनके बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल निवेशकों से पैसा इकट्ठा करने, पोंजी स्कीम की तरह पुराने निवेशकों को रिटर्न देने और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया जाता था। इस तरह, अपराध से हुई कमाई को कई लेयर्स में घुमाया जाता था। इसका मकसद, अपराध की कमाई के असली सोर्स और मालिक को छिपाना था। इससे पहले, ईडी ने जून 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद में 25 जगहों पर तलाशी ली थी। इसमें 2.05 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए और बैंक व क्रिप्टो अकाउंट्स में मौजूद 15.31 करोड़ रुपये फ्रीज़ किए गए।
सुभाष चंद्र बिजनोरिया को 10.08.2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया गया था। वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, 06.10.2026 के प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए ईडी ने 69 अचल संपत्तियों और 26 बैंक अकाउंट्स/टर्म डिपॉज़िट में मौजूद बैलेंस को अटैच किया। इनकी कुल कीमत 34.91 करोड़ रुपये है। इनमें धोलेरा और धंधुका (गुजरात) में ज़मीन के टुकड़े और प्लॉट, अहमदाबाद और सीकर में रिहायशी फ़्लैट और कलंगुट, गोवा में एक रिज़ॉर्ट कंपनी में 45% हिस्सेदारी शामिल है। इसके साथ ही, इस मामले में अब तक लगभग 52 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त/फ्रीज़/अटैच की जा चुकी है। मामले में आगे की जांच चल रही है।