सुप्रीम कोर्ट अपडेट: राहुल गांधी पर महिला पत्रकार से धक्का-मुक्की के आरोप, कब होगी सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी पर महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की के आरोप से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के लिए 26 अक्तूबर की तारीख तय की है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह मामला उठाया था। वहीं, वकील जय अनंत देहाद्राई ने कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से व्यापारियों को संभावित आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया। सीजेआई ने त्योहारों के मौसम में छोटे दुकानदारों की आजीविका प्रभावित होने पर चिंता जताई। जस्टिस बागची ने कहा कि प्रदर्शन के अधिकार के साथ व्यापारियों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा कर दिया। अपनी याचिका में उन्होंने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में कृष्णानगर सर्किट हाउस में ठहरने की व्यवस्था को लेकर शिकायत की थी और साथ ही यह आरोप लगाया था कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के तहत विकास परियोजनाओं को लागू करने में जिला प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है।
मोइत्रा ने अगस्त 2026 में कृष्णानगर सर्किट हाउस से देर रात निकाले जाने और उसके बाद एक सितंबर को नादिया जिला प्रशासन द्वारा जारी एक सर्कुलर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस सर्कुलर में जिले के सांसदों और विधायकों के लिए सर्किट हाउस में ठहरने के वास्ते तीन से चार दिन पहले सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने कहा कि यह सर्कुलर विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस की सांसद (ममता बनर्जी की पार्टी) को निशाना बनाकर जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि अतीत में मोइत्रा बहुत कम समय की सूचना पर भी वहां ठहरती रही हैं।
दूसरी ओर, प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उस समय सर्किट हाउस में मरम्मत का काम चल रहा था और प्रशासन ने उन्हें ठहरने के लिए कोई दूसरी जगह (वैकल्पिक आवास) देने की पेशकश भी की थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तीन से चार दिन पहले सूचना देने की शर्त बदले की भावना से लगाई गई लगती है।
अदालत ने आवास को लेकर मोइत्रा की शिकायत पर विचार करते हुए लोकसभा क्षेत्र की निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में उनकी स्थिति पर भी जोर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर के सर्कुलर में बदलाव किया और निर्देश दिया कि मोइत्रा अपनी यात्रा से एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित कर दें, जिसके बाद प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार के इस तर्क को भी मानने से इनकार कर दिया कि आवास केवल उपलब्धता के आधार पर ही दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपने निर्वाचन क्षेत्र की एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के नाते सर्किट हाउस में ठहरने के लिए मोइत्रा का प्राथमिकता वाला अधिकार होगा। मोइत्रा के वकील ने बताया कि मई 2026 से 18 परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा कि वे इस शिकायत की जांच करें और उचित कदम उठाएं। साथ ही अदालत ने मोइत्रा को यह छूट भी दी कि यदि वह अभी भी संतुष्ट नहीं होती हैं तो वह संबंधित उच्च न्यायालय में जा सकती हैं।
डिजिटल कोर्ट टेक्नोलॉजी ऑफिस का उद्घाटन, सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति ने न्यायिक तकनीक को मजबूत करने के लिए उठाया कदम
सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति ने शुक्रवार को 'डिजिटल कोर्ट टेक्नोलॉजी ऑफिस' (डीसीटीओ) का उद्घाटन किया है। यह एक केंद्रीकृत प्रशासनिक और तकनीकी निकाय है, जिसका काम भारतीय न्यायपालिका के तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए सभी योजनाओं को बनाना, उन्हें लागू करना और उनकी निगरानी करना होगा। शीर्ष अदालत के प्रशासनिक भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन ई-समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने किया। इस दौरान ई-समिति के उपाध्यक्ष जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा, न्याय विभाग के सचिव नीरज वर्मा और एनआईसी के महानिदेशक प्रियंक भारती भी मौजूद रहे।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, 'ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट' के तहत शुरू किया गया यह नया कार्यालय ई-समिति की सभी तकनीकी पहलों की देखरेख और संचालन करेगा। इसका मुख्य मकसद तकनीक के इस्तेमाल से न्याय प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता और आम लोगों के लिए सुलभता को बढ़ाना है, ताकि समाज की बदलती जरूरतों के हिसाब से अदालती कामकाज को और बेहतर बनाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय द्वारा दायर याचिका पर जारी किया गया। प्रदीप राय ने कहा कि उन्हें बड़े अफसोस के साथ यह याचिका दायर करनी पड़ी, क्योंकि दोनों जिम्मेदार पदों पर हैं, लेकिन उनकी टिप्पणियां दुर्भाग्यपूर्ण थीं और संस्थान के सम्मान के खिलाफ थीं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर ध्यान दिया है। जैसा कि मैंने कहा, मुझे यह पिटीशन बहुत अफसोस के साथ फाइल करनी पड़ी, खासकर इसलिए क्योंकि ये टिप्पणियां दो बहुत जिम्मेदार लोगों, सांसद संजय राउत और सीनियर पत्रकार निखिल वागले ने की थीं।'
उन्होंने कहा कि मैंने निखिल वागले के आर्टिकल कई बार पढ़े हैं और उनके काम को फॉलो किया है। उन दोनों की टिप्पणियां बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण थीं। मेरा मानना है कि ऐसे कमेंट्स की कोई जरूरत नहीं थी। उन्हें फैक्ट्स सत्यापित करने चाहिए थे, और गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। प्रदीप कुमार राय ने कहा कि आपको उस संस्थान का सम्मान करना चाहिए जिसमें आप काम करते हैं। एक ऐसा इंस्टीट्यूशन जिसे पूरा देश मानता है, आप उसके साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते। एक संस्थान स्थायी होता है। लोग आते-जाते रहते हैं। हम कल यहां हों या न हों, लेकिन संस्थान हमसे पहले भी था और हमारे बाद भी रहेगा।
उन्होंने कहा कि इसलिए लोगों को ऐसे कमेंट करने से पहले ध्यान से सोचना चाहिए। मैं उन लोगों से अपील करूंगा जो फालतू कमेंट करते हैं कि वे जिम्मेदारी से काम करें और कम से कम, इंस्टीट्यूशन के खिलाफ बोलने से बचें।
इसी बातचीत के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता के वकील अभिजीत सिन्हा ने कहा, 'हमने मरहूम त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा की तरफ से एक ट्रांसफर पिटीशन फाइल की है, जिसमें भोपाल में चल रहे ट्रायल को मध्य प्रदेश से बाहर किसी जगह पर ट्रांसफर करने की मांग की गई है, क्योंकि पिता दिल्ली-एनसीआर इलाके में रहते हैं, इसलिए हमने केस को नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की है।