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विशेष रोडमैप तैयार: तुर्किये-पाकिस्तान गठजोड़ को मिलेगा भारत का कड़ा जवाब, क्या है पूरा मामला?

Tue, 13 Oct 2026 05:29 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Tue, 13 Oct 2026 05:29 AM IST
सार

तुर्किये और पाकिस्तान के गठजोड़ को भारत का कड़ा जवाब मिलेगा। विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में सभी देश अपने हितों के प्रति सतर्क हैं। क्या है पूरा मामला?

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Special roadmap prepared India to give strong response to Türkiye-Pakistan alliance know geopolitics story
तुर्किये पाकिस्तान की नजदीकी पर भारत की पैनी नजर - फोटो : अमर उजाला एजेंसी

विस्तार

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तुर्किये और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच भारत भी ग्रीस और साइप्रस जैसे उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह साइप्रस और ग्रीस की चार दिवसीय यात्रा को इसी व्यापक सामरिक संदर्भ में देखा जा रहा है। समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर केंद्रित यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब तुर्किये-पाकिस्तान सैन्य साझेदारी भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं में अहम बनी हुई है। ऐसे में भारत भी भूमध्यसागर में अपनी सामरिक पहुंच मजबूत करने में भी जुटा है।

तुर्किये-पाकिस्तान गठजोड़ और भारत की चिंताएं
भारत और तुर्किये के बीच संबंधों में पाकिस्तान का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को उन्नत बेयराक्तार ड्रोन्स दिए, जिनका उसने सीमा पर खूब इस्तेमाल किया। तुर्किये पाकिस्तान के साथ मक्का रक्षा गठबंधन में भी शामिल है। साथ ही अंकारा ने इस्लामाबाद के साथ रक्षा उत्पादन और नौसैनिक सहयोग भी बढ़ाया है। तुर्किये पाकिस्तान के लिए युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में भी शामिल है। ऐसे में ग्रीस और साइप्रस के साथ भारत के बढ़ते रक्षा संबंध क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गए हैं।

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भारत का जवाब
भारत ने पिछले कुछ महीनों में ग्रीस और साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग जमीन पर उतारने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग पर एक छह साल का विशेष रोडमैप तैयार किया गया है, बकि ग्रीस के साथ पिछले दिनों द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना पर हस्ताक्षर किए। साथ ही रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए एक साझा घोषणा पत्र का आदान-प्रदान भी किया गया। ग्रीस अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण यूरोप का पूर्वी प्रवेश द्वार है। यह भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है, जो भारत को यूरोपीय बाजारों से जोड़ती है। ग्रीस और भारत जल्द ही सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री निगरानी, साझा रक्षा तकनीक व उत्पादन में सहयोग बढ़ाएंगे। भारतीय विश्व मामलों की परिषद (आईसीडबल्यूए) ने भी अपने एक लेख में भारत, ग्रीस और साइप्रस के बीच त्रिपक्षीय सामरिक सहयोग को तुर्किये-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी के काउंटर के रूप में देखा है। ग्रीस और साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाकर भारत अपने रणनीतिक विकल्प मजबूत कर रहा है।

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